Ādhunika Hindī ālocanā

Pirmais vāks
Grantha-Bhāratī, 1967 - 475 lappuses

No grāmatas satura

Lietotāju komentāri - Rakstīt atsauksmi

Ierastajās vietās neesam atraduši nevienu atsauksmi.

Citi izdevumi - Skatīt visu

Bieži izmantoti vārdi un frāzes

अथवा अधिक अपने अभिनवगुप्त अर्थ अर्थात् अलंकार आदि आधार पर आलोचना इन इन्होंने इस प्रकार इसी ई० उसका उसके उसे एक ऐसा कर करने कला कल्पना कवि कहा जा कहा है का का उल्लेख काव्य काव्य के किन्तु किया गया है किया है किसी की की दृष्टि से कुछ के अनुसार के कारण के द्वारा के रूप में के लिए के साथ केशव को कोई क्योंकि गए गुण चाहिए जा सकता है जाता है जिस जी ने जो तक तथा तो था दिया दो दोनों नहीं है नाट्य नाम पर पर भी पृ० प्रथम प्रयोग प्राप्त बात भरत भाव भी भेद मात्र मान मानते हैं माना माना जा सकता में ही यदि यह यहां या ये रस लक्षण वस्तु वह वही वाले विचार विवेचन विशेष वे शब्द शुक्ल जी संस्कृत सकती साहित्य से ही सौन्दर्य स्पष्ट हिन्दी ही है हुआ है और है कि होता है होती होने

Bibliogrāfiskā informācija